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चेतावनीः 26/11 पर अमेरिका ने पाकिस्तान को चेताया, हाफिज को तुरंत गिरफ्तार करो वर्ना…

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मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद को रिहा करने पर अमेरिका ने शनिवार को पाकिस्तान को एक बार फिर चेताया है। ह्वाइट हाउस ने कहा कि अगर इस्लामाबाद मुंबई धमाकों के मास्टरमाइंड पर कार्रवाई नहीं करता है तो इसका अमेरिका पाकिस्तान रिश्तों पर बुरा असर पड़ सकता है।

ह्वाइट हाउस ने एक बयान में कहा कि हाफिज की रिहाई से पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने के वादे को झटका लगा है। पाकिस्तान दावा करता रहा है कि वह अपनी जमीन पर आतंकवादियों को पनाह नहीं देगा। अगर पाकिस्तान अंतराष्ट्रीय क्षेत्र में आतंक फैलाने के लिए हिरासत में लिए गए हाफिज सईद पर उचित कार्रवाई नहीं करता है तो इसका अमेरिका पाकिस्तान के द्वीपक्षीय रिश्तों पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ इससे पाकिस्तान की वैश्विक छवि पर बुरा असर पड़ेगा।

वाइट हाउस ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी दी कि अगर हाफिज को दोबारा तुरंत गिरफ्तार कर उसपर मुकदमा नहीं चलाया गया तो इसका नतीजा द्विपक्षीय संबंधों और दुनियाभर में पाकिस्तान की छवि पर बुरे असर के रूप में दिखेगा।

वाइट हाउस ने सईद को एक ‘कुख्यात आतंकवादी’ बताया और कहा कि सईद के दोषी होने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमति है। इस सहमति पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 1267 के तहत दिसंबर 2008 में मुहर लगी थी। इसके साथ ही, डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी ने उसे विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है।

वाइट हाउस के बयान में कहा गया है, ‘जैसा कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की दक्षिण एशिया पॉलिसी में स्पष्ट है, अमेरिका पाकिस्तान के साथ एक रचनात्मक रिश्ते की उम्मीद करता है, लेकिन पाकिस्तान की जमीन पर अड्डा जमाए उन उग्रवादी और आतंकवादी समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की भी अपेक्षा रखता है जो क्षेत्र के लिए खतरा हैं।

सईद की रिहाई गलत दिशा में बढ़ाया गया कदम है। पाकिस्तान सरकार के पास अब हाफिज सईद को उसके अपराध के लिए गिरफ्तार और आरोपित कर बिना विभेद के सभी तरह के आतंकवाद से लड़ने के प्रति गंभीरता प्रदर्शित करने का एक मौका है।’

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से भी इसी तरह के लेकिन थोड़े नरम बयान के तुरंत बाद आए वाइट हाउस के इस राजनीतिक संदेश में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का बिल्कुल खरा-खोंटा अंदाज साफ झलक रहा है। इस बयान में वह राजनियक नफासत नहीं दिख रही जिसे विदेश मंत्री को ओढ़ना पड़ता है। अब यह देखना है कि क्या पाकिस्तान अमेरिका की बात मानता है और अगर नहीं तो अमेरिका क्या करेगा।

यह बयान वाइट हाउस को अमेरिकी संसद से भी अलग करता है जिसने पिछले हफ्ते ही डिफेंस बिल के उस प्रावधान को बदल दिया था जिसके तहत पाकिस्तान सरकार को लश्कर-ए-तैयबा और हक्कानी नेटवर्क, दोनों की गतिवितियों पर कठोर रूप से अंकुश लगाने की दिशा में कदम उठाने को मजबूर किया जाता। लेकिन, संशोधित बिल में सिर्फ हक्कानी नेटवर्क पर कार्रवाई की बात कही गई है जिससे स्पष्ट होता है कि वॉशिंगटन को पूर्वी क्षेत्र में खासकर लश्कर-ए-तैयबा, हाफिज सईद और उनकी गतिविधियों की कोई चिंता नहीं है।

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